मैं तुम्हे हमेशा प्यार करूँगा-Sad love story in hindi । New kahani hindi

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मैं 6 साल बाद अपने घर लौटा था। घर आने के बाद पहली बार मैं इस मंदिर आया था।बहुत कुछ बदल चुका था वहाँ।आज भी वैसी ही भीड़ थी जैसे 6साल पहले एक दिन थी।जो पेड़ पहले हरे भरे थे वो आज सूख चुके हैं।जो तालाब पहले पानी से भरे हुए थे वो आज सूखे गए।ये वही मंदिर था जहाँ 6 साल पहले "तनू"और "मेरी" प्रेम कहानी शुरू हुई थी।

वो दिसंबर 22 का महीना था।रात भर सोया हुआ सूरज नींद में सराबोर होता हुआ चाँद से निकलने की इज़ाज़त मांग रहा था।सुबह की सर्द हवाये कई लोगो की यादें लेकर फिर चल पड़ी थी। पेड़ पर पड़ी ओस की बूंदे फिर से मिट्टी में मिल जाने को तड़प रही थी।जामीन में लगी घास पर पड़ी ओस की बूंदे ऊपर से आते हुए आँशुयो को छुपाने की कोशिस कर रहे थे।
चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था।हम फिसलन भारी घास पर चल रहे थे।
मैं घास पे पड़े ओस पर फिसलकर गिर गया और मेरा हांथ जमीन पर पड़े पत्थर से टकरा गया।"आह"!
"लगी तो नही"तनू ने पूछा।

"नही तो बिल्कुल नही लगी मुझे।"मैंने मुस्कुराते हुये कहा।

"दिखाओ जरा अपना हाथ,*OMG*इसमें तो खून आ रहा है"

तनू ने अपने जेब से सफेद रुमाल निकालकर मेरे हाथ में बांध दिया।

"अब आज नही जाएंगे,चलो घर चलते है"

उसकी आवाज में भारीपन आ गया था।सायद वो उदास थी मेरे चोट लगने से।

"नही आज ही चलते है,फिर सायद हमे ये मौका फिर न मिले।"

हम नदी के किनारे पानी के ऊपर घने कोहरे के बीच से उगता हुआ सूरज देखना चाहते थे।मैंने अपनी नीं पर बैठकर तनू की आंखों में देखते हुये दुनिया सबसे खूबसूरत तीन शब्द बोले थे।
"ई लव यू तनू"

तनू ने जामीन से उठाकर मुझे गले लगा लिया और बोली "प्रॉमिस मी 'अभी' तुम हमेशा ऐसे ही प्यार करोगे न और मुझे कभी छोड़कर मत जाना।"
तनू से किया हुआ वो वादा मैं नही निभा पाया।पर मैंने बहुत कोसिश की अपने वादे निभाने की तुम्हारे उस आखिरी फ़ोन कॉल के बाद तक।फिर मैं कमजोर पढ़ गया तुम्हारा साथ न पाकर।

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मुझे अच्छे से याद है वो दिन जब मैंने तनू को पहली बार मंदिर में देखा था।मंदिर के बाहर दुकानों में बहुत भीड़ थी।मैं पास की दुकान में फूल खरीद ही रहा था कि तभी मेरे पीछे से एक धीमे स्वरों में आवाज आई "प्रसाद दे दीजिए भईया!"उसकी आवाज कुछ खास थी और हो भी क्यों न वो महज 18 साल की लड़की की थी।मैं कोशिस कर रहा था पीछे मुड़कर उसे देखने की,क्योंकि मुझे उसकी आवाज बहुत अच्छी लगी थी इतनी की उसकी आवाज मेरे कानों में गूंजने लगी थी।मैने उसे अभी तक नही देख पाया था देखा था तो बस उसके हाथ मे पड़ा एक काँच का कंगन,उस कंगन की चमक सामने दुकान में लगे सीशे से टकराकर सीधे मेरे चेहरे पर आ रही थी।उस कंगन की चमक से मेरी आँखे खुल नही रही थी।जैसे तैसे फूल लेकर मंदिर की लाइन में लग गया।महज कुछ ही कदमो की दूरी पर वो खड़ी होकर अपने नंबर आने का इंतज़ार कर रही थी।मैं फिर उसे देखने की नाकाम कोशिस करता हुआ आगे बढ़ता जा रहा था।मैं भी उसके पीछे जाना चाहता था पर भीड़ इतनी थी कि वहाँ खड़ा होना मुश्किल था।चारो तरफ लोगो का जमावड़ा लगा हुआ था लोग दूसरे दूसरे को आगे की तरफ धक्का मार रहे थे।तभी मेरे पैर में बहुत तेज़ी से दर्द हुआ नीचे झुककर देखा तो एक दादा जी का पैर मेरे पैर पर था।मैंने दादा जी से पैर हटाने की विनती की।उनके पैर हटाते ही मैंने सुकून की सांस ली।दर्द से अपना ध्यान हटाते हुए देखा तो वो कंगन वाली लड़की जा चुकी थी।मैं चारो तरफ उसे देखा पर वो नही दिखी।फिर मैंने जैसे-तैसे मैंने भगवान से दर्शन किये और बाहर आ गया।

मुझे शांत जगह बैठना बहुत अच्छा लगता है खामोश पेड़ अपने अंदर बहुत से दर्द छुपाये हुए होते है उनके नीचे बैठकर उनकी अनकही बाते सुनना अच्छा लगता है।मंदिर के पीछे एक तालाब था।सुबह के समय वह बहुत कम लोग आते थे।वहाँ पहुचकर देखा तो वो उनमे से एक थी।खुले बाल,कानो में छोटी-छोटी ईयररिंग्स, गले मे एक लॉकेट बहुत ही सुंदर लग रही थी वो, बिल्कुल परी जैसी।वो ठहरे हुए पानी में अपना पैर डालकर हिलाते हुए ऐसे निहार रही थी जैसे
कुछ खो गया हो उस पानी में।उनके ठीक पीछे खड़े पेड़ कभी उसपे छाव तो कभी धूप ला रहे थे।

मैं उससे कुछ दूरी पर जाकर बैठ गया और अपने पैर पानी में डाल लिए पानी काफी ठंडा था सायद कई दिनों से भरा हुआ था।रंग बिरंगी मछलियां मेरे पैरों को छू रही थी।तभी उनमे से एक मछली मेरे पैर के नीचे आकर रुक गयी।सायद वो मेरे पैर में कुछ लगा था वो वही खा रही थी।वहाँ के पत्थर पर लगी काई मुझे पानी की तरफ ले जा रही थी।तभी वो मेरे करीब आयी औऱ बोली "यहाँ आराम से बैठना कही फिसल न जाना,तालाब बहुत गहरा है।"उसकी आवाज में वही मिठास थी जो मैंने दुकान पे सुनी थी।

"क्या तुम यहाँ रोज आते हो,क्योंकि तुम्हारे पैर के पास मछलियां घूम रही है।सायद वो तुमको पहचानती है।मैं तो इनके लिए रोज खाने के लिए लाती हूँ।"उन्होंने ने मुझसे बोला।

"मछलियाँ हमेशा शांत जगह खोजती है,और मैंने देखा था आपको पानी मे पैर हिलाते हुए।"
पहली मुलाकात में उन्होंने अपना नाम "तनू"बताया था।

वही हमारी पहली मुलाकात हुई।मैंने तनू की पहली मुलाकात को किसी फिल्म की रील की तरह कई बार उसको मैंने अपने ख्वाबों में चलाया था।मैं हर बार तनू से मिलने से पहले सोचता था कि आज तनू से ये बताऊंगा वो बताऊंगा पर जैसे ही वो मेरे सामने आती,मेरे होंठ बिल्कुल चुप हो जाते थे।मानो मेरे होंठों पर किसी ने अपनी उंगलिया रख दी हो और चुप रहने को कह रही हो।और उसके होंठ कभी न रुकने वाली बारिश की तरह थे।वो बहुत बोलती थी।एक बार मेरे पूछने पर बताया था उसने की वो 12th क्लास में थी।उसने 12वी की परीक्षा में 90% अंक हाशिल किये थे।वो अब इंजीनियरिंग करके विदेश जाना चाहती थी।वो खुले अश्मान में उड़ना चाहती थीं पक्षियों की तरह।उसके सपने बहुत बड़े थे और उन्ही सपनो में मैं भी कही खोने वाला था।
हम हफ्ते में एक बार जरूर मिलते थे।पहले कई दिनों तक हम मंदिर में मिले और नई नई जगह घूमने लगे।हमारी दोस्ती हो गयी और दोस्ती में कब प्यार हो गया पता ही नही चला।

ठंड में पेडो से ओस गिरना देखना मुझे किसी जादू से कम नही लगता था।मैं हर रोज सुबह अपनी बालकनी से घने कोहरे से निकलते हुए सूरज को देखा करता था।मैं अक्सर सोचता था कि जिस दिन मुझे प्यार होगा उस दिन बेतहाशा बारिश होगी और उस दिन कुछ ऐसा ही हुआ था।उस दिन बादल भी दिल खोलकर बरसे थे।मैं अपने कमरे की खिड़की से सामने खड़े पेड़ से गिरते बारिश की बूंदे देखकर मैने पूरी रात काटी थी।मेरे घर के बाहर रास्ते मे भरा पानी किसी समंदर से कम नही लग रहा था।मैंने खिड़की से अपना हाथ बाहर निकल कर उस बारिश को महसूस किया था जिसका मुझे बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था।उस रात मैंने उस आवाज को कई बार अपने कानों में सुना था,तनू की आवाज।मुझे सायद उससे सच्ची मोहब्बत हो गयी थी।मेरे दोस्तो ने मेरा बहुत मज़ाक बनाया था कि तू भी रात-रात भर जागने लगा है किसी के खयालों में।

एक रोज कुछ हुआ जो पहले मेरे साथ कभी नही हुआ था।तकरीबन 3 महीने की बात चीत के बाद मैंने तनू का नंबर मांगने की कोसिश की और मुझे मिल भी गया।फिर फ़ोन पर बातों का सिलसिला कुछ ऐसा शुरू हुआ कि हमारी घंटों बातें होने लगी।बात करते करते एक अरसा बीत गया।नजाने हम दोनों इतनी बातें कहाँ से लेते थे रात के सपनो से या चांदनी रात से।

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एक दिन मैंने तनू से पूछा
"मेरे साथ डेट पर चलोगी"
"हा"
मुझे आज भी याद है उसने छोटा सा शब्द सरमाते हुए कहा था।

"तो फिर सुबह 6 बजे तैयार रहना"

"6 बजे इतनी सुबह डेट पर कौन ले जाता है।"तनू ने घबराते हुए मुझसे कहा।

"तुम्हे डर लग रहा है"मैंने कहा।

"नही बिल्कुल नही!"

"तो फिर तैयार रहना,एक सरप्राइज है तुम्हारे लिए।"

"ठीक है,पर हम मिलेंगे कहा"

"वही जहा हम पहली बार मिले थे"।
तनू ने मुस्कुराते हुए मेरे माथे को चूम लिया।
मैं तनू को हमारे अलाहाबाद शहर के जगमगाता हुआ
New Yamuna Bridge दिखाना चाहता था।मैंने सुना था अपने दोस्तों से की यमुना नदी और उसपे खड़ा ब्रिज बहुत खूबसूरत लगता है सुबह के समय।उसी को दिखाने मेरी चाहत थी।हम दोनों वही मंदिर के पास दुकान पर मिलने वाले थे जहाँ मैंने तनू को पहली बार देखा था।तनू ने मेरी पसंदीदा काले रंग  का सूट पहना हुआ था और हाँथो में वही कंगन था जिसने मुझे तनू से मिलाया था।मैं वहाँ पहुँचा तो देखा कि तनू पहले से खड़ी मेरे आने का इंतजार कर रही थी।मैंने तनू की पसंदीदा ब्लैक शर्ट पहनी थी जो मुझे तनू ने गिफ्ट में दी थी।मैं बहुत खुश था उसका साथ पाकर। पहले हम दोनों मंदिर गए वहाँ हम दोनों ने एक दूसरे के लिए मन्नते मांगी।ईश्वर को धन्यवाद किया हमे मिलाने के लिए।

फिर मैं और तनू पैदल ही जा रहे थे कुछ हसीन बातें के साथ।उस समय अलाहाबाद की खाली सड़कों पर मैं,तनू थे और हमारे साथ बहती सर्द हवाये।कुछ दूर चलने के बाद हम वही पहुच गए।वहाँ से यमुना ब्रिज लाइट की चमक से साफ दिखाई दे रहा था।ब्रिज से पड़ती रोशनी पानी पर चमक बिखेर रही थी।अशमान से आती चाँद की रोशनी में हमारा शहर जगमगाता हुआ दिख रहा था।हम वहाँ से अपने शहर को देखते हुए 1 घंटा बिता दिया था।बादलों में छिपा सूरज अपने होने का अहसास करा रहा था।चारो तरफ शांति भरा माहोल था।पानी से छूती ठंडी हवा हमारे गालों पर महसूस हो रही थी।

अब मैं और तनू साथ थे।मैं बहुत खुश था तनू का साथ पाकर।कितना कुछ एक जैसा था हमारे बीच बातें,साथ घूमने की चाहत,जीने मारने के वादे और भी बहुत कुछ,देर रात तक फ़ोन पर बातें करना, ग्रीटिंग कार्ड देना और उन ग्रीटिंग आकार्ड में  ढेर सारी बातें लिखना और उन बातों में बेइंतहा प्यार, कुछ ऐसा प्यार था हमारे बीच में।मैं हमेशा पूछता तनू था तनू से"तुम मुझसे कितना प्यार करती हो।"
वो हमेशा की तरह अपनी बहे फैलाकर बोलती "इतना!"

हम दोनों सोचते थे कि हम एक-दूजे के लिए ही बने है।तनू को अभी बहुत पढ़ना था,दुनिया घूमनी थी।वो जब भी विदेश जाने की बात करती थी मैं चुप हो जाता था।ऐसा नही है कि मैं इसे जाने से रोकना चाहता था पर मैं उसे खुद से दूर भी नही जाने देना चाहता था।हमारे और तनू की ख्वाहिशे बिल्कुल अलग थी।मुझे यही रहना था अपने माँ-पापा के साथ,अपनो के करीब रहकर कुछ करना था औऱ तनू को एक अलग दुनिया बनानी थी।जिसमे सायद मैं नही था।

मुझे लगता था प्यार ही काफी होता है पूरी जिंदगी साथ बिताने के लिए।पर मैं गलत था बिल्कुल गलत।

उसको MNIT में एडमिशन मिल गया।अब उसके जाने का वक्त हो गया था मुझसे दूर कोसो दूर जाने का।एक शाम मुझे फ़ोन आया और बोली-

"कल शाम 6 बजे की मेरी ट्रैन है,मुझे छोड़ने तो आओगे न"तनू ने मुझसे कहा।

"जा जरूर"मैंने रूखे मन से जवाब दिया।

"अच्छा और कौन आएगा है स्टेशन छोड़ने।"

"पापा काम से बाहर गए हुए है,भईया का कल एग्जाम है लखनऊ में तो वो आज चले जायेंगे,माँ चलेगी।"

स्टेशन का बोर्ड देखते ही मुझे डर लगने लगा था तनू के खोने का डर।मैं अपने डर को जाहिर नही कर सकता था,तनू से भी नही।मेरे पैर आगे नही बढ़ रहे थे ऐसा लग रहा था की मुझसे कोई कह रहा हो कि रोक लो तनु को खुद से दूर जाने से।मैं तनू से लिपटकर रोना चाहता था एक बार,बताना चाहता था कि जिससे तुम दूर जा रही हो वो नही जी सकता तुम्हारे बिना।पर मैं ऐसा नही कर सकता था।

स्टेशन पर ज्यादा लोग नही थे।प्लेटफार्म न-1 पे चार कुर्शिया पड़ी थी।हर कुर्सी पर 2-2 आदमी बैठे थे।मेरे ठीक सामने एक कुर्सी खाली पड़ी थी।हम वही बैठ गए।सामने गड़ी में समय 05:15min हो रहा था।
ट्रैन के आने में अभी वक़्त बाकी था।सुरज अपनी लालीमा बिखेरे हुए पड़ो में छिपता जा रहा था।वो आती हुई ट्रैन को एक टक देख रही थी और मैं उसके मुस्कुराते हुए चहरे को देखते हुए बोला।

"फिर कब आओगे"
उसने मेरी तरफ देखा और ओर कोई जवाब नही दिया।मैंने तनू की खामोशी में इनकार को सुन लिया था।सायद वो अब आना ही नही चाहती थी।फिर दोबारा पूछने की हिम्मत नही हुई क्योंकि मैंने उसकी खामोशी पढ़ ली थी।

"समंदर की लहरों को कब तक बांध कर रखा जा सकता है,
मोहब्बत होगी अगर रेत से तो एक दिन किनारे मिलने जरुर आएगी।"

धीरे धीरे वक़्त गुजरता गया।हुम यूही एक दूसरे को देखते रहे।पहली बार ऐसा हुआ था कि इतने समय के लिए मिले और कोई भी बात नही हुई।ट्रैन के आने का समय हो गया।मैंने भी एक लंबी सांस ली और खुद को संभाला,क्योंकि मैंने तनु को जाते हुए खुश देखना चाहता था बस।तभी ट्रैन का अनाउंस हुआ और ट्रेन आती दिखाई देने लगी।तनु ने अपनी माँ गिरते आँसुओ को झट से पोछ दिया।तनु को कार्नर की सीट दिला कर मैं बाहर आ गया और खड़ा हो गया।मैं पलटकर नही देखना चाहता था क्योंकि मैं उसे अपना उदास चहरा नही दिखा सकता था।तभी मेरे मेरे पीछे आवाज आई-"अभी"
पीछे पलटकर देखा तो तनु थी।
"मैंने तुम्हारे सवाल का जवाब नही दे सकी क्योंकि मुझे खुद इस सवाल का नही पता है।"
"हमेशा की तरह मैं आज भी उसके सामने कुछ नही कह सका।"मैंने अपना हाथ हिलाकर उसे अलविदा कहा।ऐसा लग रहा था,तनू के जाते ही हमारा उसके साथ सब कुछ जा रहा था जैसे वो पल जो हमने साथ बिताये थे,वो सपने जो हमने साथ मिलकर देखे थे,वो हर एक याद जो मैंने अपने दिल के एक कोने में संभाल कर रखी थी।

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उसके कॉलेज जाने के बाद हमारी बातें धीरे धीरे कम होती चली गयी।पहले तो कभी कभी फ़ोन आ भी जाता था फिर वक़्त से साथ वो भी आना बंद हो गया।
वो कहते है ना वक़्त के साथ सब कुछ बदल जाता है।प्यार भी और हर वो रिश्ता जो प्यार से जुड़ा होता हैं।

1साल 2 साल धीरे धीरे 4 साल बीत गए थे।अब वो रिश्तो का रंग फीका पड़ गया था।वे जो मैंने और तनू ने अपने प्यार से भरे थे।अब हम दोनों ही बदलने लगे थे।अब वो अपने सपने को ज्यादा अहमियत देने लगी थी मुझे खुसी थी इस बात की पर दुख ये था कि सायद वो मुझे खो रही है।ख्वाहिशो के साथ और बहुत कुछ बदल गया था हमारे बीच।वो सपने अब टूटने लगे थे जो हमने एक साथ देखे थे ।वो वादें भी टूटने लगे थे जो हमने किये थे।कुछ आ गया था हमारे रिश्ते के बीच,कभी न भरने वाली खाली जगह सी बन चुकी थी हमारे बीच।
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मैंने भी लखनऊ के एक इंजिनीरिंग कॉलेज में एडमिशन मिल गया।अपनी जिंदगी में तनू का पास न होने गम अक्सर उदास कर देता था मुझे।मेरी हर खुसी तनू के बिना अधूरी सी लगती थी।पर वो कहते है ना वक़्त के साथ सब बदल जाता है।तनू को दिल्ली में ही जॉब मिल गयी थी। अब उसके विदेश की टूर भी होने लगें थे।वो अपनी जिंदगी बहुत खुस थी।कभी कभी मैं दिल्ली जाता था तो कभी वो मुझसे मिलने लखनऊ आती थी पर ये सब कुछ ही दिनों तक चला।अब मुझे कोई फर्क नही पड़ता था कि तनू का फ़ोन आये या न आये एक रोज तनू का फ़ोन आया मैं बहुत खुश हो जाता था जब तनू से मेरी बात होती थी मानो किसी किसी सूखे खेत मे बारिश हुई हो।पर मुझे आज भी भी याद है फ़ोन पर कहे गए तनू के आखिरी शब्द-
"अपना खयाल रखना अभी"

उसके बात करने का तरीका पिछले सालों से बिल्कुल बदल गया और शायद तनू भी अब बदल गयी थी या शायद हम दोनों ही बदल गए थे।जो कभी बात किये बिना दिन नही जुगरता था वहाँ अब दिन से हफ्ते और हफ़्तों से महीने।हमारे रिश्ते के कठोर बर्फ की चादर अब पिघलने लगी थी और मैं उसे सवारने की नाकाम कोशिस कर रहा था।पर कब तक करता ये कोशिस,आखिर कब तक।

5 साल बाद मुझे पता चला कि तनू ने सादी कर ली।अब मुझे कोई फर्क नही पड़ता था।पर न जाने क्यों मैं उस रात बहुत रोया था मुझे अहसास हुआ कि मैंने तनू को खो दिया था।किसी को खो देने का अहसास कितना डरावना होता है ये मुझे उस दिन पता चला था।

मैं बहुत थक गया हूं इसकी यादों का बोझ उठाते-उठाते 6 साल हो गए थे मुझे और तनू को अलग हुए पर इन 6 सालों में मैं एक पल के लिए भी तनू को भुला नही पाया था।

मैं 6 साल बाद लौट था।फिर उसी सुबह की तरह मंदिर वाले तालाब के पास जाकर बैठ गया और तालाब के चारो ओर देख ही रहा था की अचानक मेरी आंखें एक ही जगह पर आकर रुक गयी
"ये तो तनू है।"क्या तनू यह रोज आती है।क्या वो मेरा आज भी इंतज़ार कर रही है।ऐसे अनेक सवाल मेरे मन मे उठ रहे थे पर मेरे पास एक के भी जवाब नही थे।एक पल कर लिए ऐसा लग था रहा था सब रुक स गया था।बस कुछ ही कदमो का फासला था हमारे बीच।

वो पहले से बहुत बदल गयी थी जैसे उसके होंठ बिल्कुल शांत मानो इन 6 सालो में किसी से भी कुछ न कहा हो।बहुत गहरी उदासी थी उनकी आंखों में।
मेरा मन कर रहा था उससे लिपट जाऊ औऱ खूब रोयू और शिकायतें करू।आँशुयो की कुछ बूंदे मेरे गालों तक आकर रुक गयी मैंने उन्हें झट से पोछ लिया कही तनू मेरे आंशू न देख लें।

मैं भूला नही था उसे,मैं आज भी तनू को उतना ही प्यार करता हूँ जितना तनू ने मुझसे कभी किया था।
वो बहुत देर तक वही बैठी रही और मैं भी उसे निहारता रहा पर मैं उसके पास जाने की हिम्मत नही जुटा पाया।उस रात भी मैं बहुत रोया था बहुत,उस रात भी बेइंतहा बारिश हुई थी और उस बारिश में आँशुयो का एक-एक कतरा बह गया।

"ये कैसी मोहब्बत है कि मैं किस खुमार में हूं,
वो आकर जा चुकी है,और मैं आज भी उसके इंतज़ार में हूँ।।"

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दोस्तों आपको ये प्यार की सच्ची कहानी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताना और इस पोस्ट को अपने दोस्तों में ज्यादा से ज्यादा शेयर करना और हम आपको बता दे की हम ऎसी ही प्यार की कहानिया आप तक पहुंचाते रहेंगे ।हमे follow करे ।।

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