दो वचन-Sad Hindi love story

दो वचन-Sad Hindi love story


Sad Hindi love story  । sad love story in hindi
Sad Hindi love story

आज ज जो मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूं,जो बेइंतहा दुख,दर्द और प्रेम से भरी हुई है।यह एक ऐसी कहानी है,जिसमे एक तरफ उसके माता-पिता और दूसरी तरफ है उसकी प्रेमिका।एक वादा किया गया था परिवार से और एक वादा किया गया था उससे भी।इस कहानी में पात्रों के नाम बदल कर बताये गए है।इस कहानी में लड़के का नाम अविरल और लड़की का नाम अंकिता है।
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घडी में सुबह के 7 बज रहे है और रसोई से आवाज आती है "अविरल,अविरल बेटा उठ जाओ तुम्हें कॉलेज नही जाना है क्या आज तुम्हारा कॉलेज में पहला दिन है"
कमरे से  सी आवाज रसोई तक जाती है"हा माँ उठ रहा हूं।"

तकरीबन 10 मिनट के बाद पिता की आवाज आती है"आज तुम्हारा कॉलेज जाने का मन नही है क्या।"

फिर से कमरे से धीमी सी आवाज़ आती है"आ रहा हु पापा।"

अविरल जल्दी से तैयार होकर नीचे आता है और बोलता है"माँ जल्दी से नाश्ता दो वरना कॉलेज के लिए लेट हो जाऊँगा।"

माँ-"आज तुम्हारा कॉलेज का पहला दिन है मंदिर होते हुए जाना और खूब मन लगा कर पढ़ना।"

अविरल-"जी माँ,आप बिलकुल फिकर न करे मैं खूब मन लगाकर पढूंगा।"

फिर तुझे अपने भाई को भी तो पढ़ाना है।हॉ माँ आप फिकर न करे।मैं आप सभी को कभी मिराश नही करूँगा।
अच्छा माँ मैं कॉलेज के लिए निकलता हूं वरना कहीं लेट न हो जाऊंगा।

माँ-"हा बेटा,तुझे बहुत अच्छी नौकरी मिले, तू खूब तरक्की करे और तुझे एक सुंदर सी पत्नी मिले।"

आपको ये स्टोरी भी पढनी चाहिए।
काश तुमने उस दिन पलटकर न देखा होता।very sad love story in hindi 2020.
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"क्या माँ, अभी तो मेरी खेलने की उम्र है और आप ये बोल रही है।"अविरल बोलता है माँ से।

तभी पिता जी बोलते है- "बेटा अब तुम बड़े हो चुके हों औऱ तुम्हे सही और गलत का अंदाजा खुद ही लगाना होगा।और ये सही हैं कि हमें एक बेटी(बहू) मिल जाएगी और तुझे एक खयाल करने वाली ,तेरा सुख दुख में साथ देने वाली भी मिल जाएगी।"

अविरल-"जी पिता जी"

"एक माँ के लिए बच्चे कभी बड़े नही होते है जी।" आप कुछ भी बोला करते हो जी।

पिता-"हा ठीक है भागवान"

अविरल का एडमिशन दिल्ली यूनिवर्सिटी में हुआ था।अविरल जब एडमिशन के लिए अपने कॉलेज गया था तो उससे उसका कॉलेज बहुत पसंद आया था।उसे इस बात की बहुत खुशी थी कि उसने जिस कॉलेज में प्रवेश लेने के लिए सोचा था वो वहाँ कॉलेज में पहुँच गया।

"अच्छा माँ-पापा मैं कॉलेज जा रहा हूं"अविरल बोला।

"आरामसे जाना" माँ बोली।

अविरल जब अपने कॉलेज पहुच जाता हूँ औऱ जैसे ही अपने क्लास में घुसा लोग उसे देखने लगते है।जैसे किसी भी नए बच्चे को देखते है अपनी क्लास में।
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उसी क्लास की भीड़ में कोई औऱ भी था जिससे अविरल अभी तक अनजान था और क्लास की भीड़ में भी वो सबसे अलग लग रही थी।अविरल एक पल के लिए उसमे खो सा गया था।उस दिन उसने काले रंग की जीन्स और शर्ट पहना हुआ था उसके गले मे स्काफ था,कानो में ईयररिंग्स थी और उसका कद तकरीबन 5.5 फ़ीट था।देखने में बहुत सुंदर लग रही थी बिल्कुल परी जैसी।उसकी आँखें समंदर में जैसे सीप चमक रहे हो,उसके होंठ जैसे अमृत की धरा हो मानो अविरल खो से गया था उसके ख्वाबों में।
वो उसके पास गया और उसके बगल वाली सीट पर बैठ गया।वो उसकी तरफ एक बार फिर से देखना चाहता था पर हिम्मत नही जुटा पा रहा था।जब तक वो उसकी तरफ देखता वो मेरी सीट के पास आई और बोली "Hii,I Am Sneha"।
वो उसके सामने बोलने की हिम्मत नही जुटा पा रहा था,उसकी दिल तेज़ी से बढ़ती जा रही थी।जैसे तैसे उसने खुद को संभाला और बोला
"Nyc name"

By the way"I am Aviral".

उसे नही पता कि उसे मैं कैसा लगा था पर उसने पहले बोला था इस बात की फीलिंग अलग ही थी उसे।फिर क्लास चलने लगी थी और उसका ध्यान तो कही और ही चला गया था बस उसी के बारे में सोचने लगा था।
ऐसा लग रहा था कि उसे याद करके मैं सब कुछ भूला जा रहा हूं।उसने उसे अपने सभी दोस्तों से मिलवाया।हम सभी लोग घूमने जाने लगे।ऐसे ही कई दोस्ती में महीने गुजर गए।फिर वो दोनों एक दूसरे के साथ वक़्त बिताने लगे।वो दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे।जैसे जैसे वक़्त गुजरता गया उनके भीच की दूरियां कम होती जा रही था पर उन दोनों ने कभी कोई गलत काम नही किया और न ही ऐसा करने को सोचा था।उनके बीच एक अटूट से रिश्ता बनता जा रहा था|

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फिर एक दिन उन दोनो निष्चय किया कि हम दोनों तब कुछ नही करेंगे जबतक सादी न कर ले और हम पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने घर मे सादी के लिए बात करंगे।कैसे 4 वर्ष निकल गए कुछ पता ही नही चला।उनके रिश्तों को डोर अब और भी मजबूत हो गयी थी।उन्होंने कॉलेज पासआउट कर लिया था और उन दोनों को एक बहुत अच्छी नौकरी भी मिल गयी थी। फिर उन्होंने तय किया कि अब समय आ गया है हमारे एक होने का।उन्हें पूरा भरोसा था कि "हमारी बात हमारे परिवार में सभी लोग समझेंगें पर सायद वो गलत थे।"वो दोनों अपने परिवार में बात करने से डर रहे थे।पर वो एक दूसरे के बिना जी बागी नही सकते है।डर सभी को लगता है ना जाने क्या कहेंगे इसीलिए।

स्नेहा ने मुझसे वादा किया कि अगर हमारे परिवार में नही मानते है तो हम एक दूसरे से कभी नही मिलेंगे।हम अपने सुख के लिए अपने परिवार को दुख में नही डाल सकते है।ये सब कहना जितना आसान लग रहा था पर इसपे अमल करना उतना ही मुश्किल था।उसी दिन शाम को अविरल ने मुझें बताया कि आज मैं पापा से स्नेहा से सादी के लिए बात करूंगा।

"डर तो बहुत लग लग रहा है!"अविरल ने मुझसे कहा।

"ठीक है पर बात तू ही स्टार्ट करेगा,आज  पापा का प्रोमोशन हुआ है सभी लोग बहुत खुश है, इसीलिए कहता हूं आज ही बात कर लो,भईया!"मैने अविरल भईया से कहाँ।

"हा ये सही कहा तूने!"अविरल।

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शाम को घड़ी में तकरीबन 9 बज रहे थे।आसमान में काले घने बादलों ने चांद की रोशनी को छुपा रखा था।उस दिन पापा का कंपनी में प्रमोशन हुआ था सब लोग बहुत खुश थे।माँ ने खाने में उसदिन मटर- पनीर बनाया था।सभी लोग खुसी से खाना खा रहे थे पर हम दोनों ख़ामोश थे।
वो बहुत कुछ कहना चाहते थे पर खामोश हम दोनों थे।
"क्या हुआ आज तुम दोनों को पनीर अच्छा नही बना क्या!"माँ।

"नही माँ बहुत अच्छा बना है,आखिर पापा ने बनाया है!"मैंने माँ से बोला।

"तो तुम दोनों इतना शांत क्यों हो!" माँ।

"कुछ नही माँ"बस ऐसे ही।अविरल बोले।

"माँ अविरल आप लोगो से कुछ कहना चाहते है!"मैंने बोला।

"क्या कह रहा है अभी नही!"अविरल ने मुझसे कहा।

"बोलो अविरल बेटा है क्या बात हैं!"माँ-पापा ने बोला।

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वो खामोश थे।उनकी खामोशी देखकर दोनों लोग समझ गए कुछ तो हैं।जो अविरल कहना चाह रहा है पर कह नही पा रहा है।

"अविरल खाना खा लो फिर बात करते है!"पापा बोले।

हम दोनों अभी भी खामोश थे।कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या बोलेंगे क्या नही।हमारे सब्र का बांध टूट रहा था।मेरा दिल कह रहा था सब अच्छा होगा पर आसमान के बादल कुछ और ही कह रहे थे।सभी लोग खाना कहा चुके थे।पापा ने अविरल को अपने कमरे में बुलाया।मुझे अब दर लगने लगा था और सायद वो जायज था।
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मैं उस रात 2 बजे तक जगा था तब सब ठीक लग रहा था।फिर मुझे नींद आ गयी और मुझे पता ही नही चला कि मैं कब सो गया।

उस दिन की सुबह हम सब को जिंदगी भर के लिए दर्द देने वाली थी।हम सब की जिंदगी में अंधेरा होने वाला था।
मैं सुबह जब उठा,समय देखने के लिये तो  देखा एक खत रखा था मेरी घडी के नींचे था।
उस खत के सबसे उपर लिखा था।
"मैं हार गया मेरे भाई"मैं बहुत डर गया था।अंदर खोल के देख मेरे होश उड़ गए।
उसमे लिखा था-

"मेरे भाई आज मेरी आखिरी बात मान ले।आज के बाद तुझे मेरी कोई भी बात माननी नही पड़ेगी।आज के बाद मैं तुझे कभी तंग नही करूँगा।वचन दे मुझे आज के बाद कभी माँ-पापा को तंग नही करेगा।उन्हें पैसे के लिए माँ-पापा को तंग मत करना।मैंने तुम्हारे खाते में 7 लाख रुपये डाल दिये।मैं जनता हू की ये पैसे बहुत कम है,पर ये रुपये संभाल के खर्च करना।
मेरे भाई माँ-पापा को कभी मत छोड़ना उनका हमेसा साथ देना।उन्हें इतना प्यार देना की उन्हें मेरी याद बिल्कुल न आये।
मुझे माफ़ कर देना मेरे भाई तुझे तुझपे इतनी ज्यादा जिम्मेदारी दी रहा हूं।मैं बहुत खुशनसीब हूं जो मुझे ऐसा परिवार मिला।माँ-पापा को कभी रोने मत देना।आज मैं तुम्हे दो अनमोल रत्न(माँ-पापा) सौपे जा रहा हू।तू कभी मत रोना, अगर तू रोया तो माँ-पापा टूट जाएंगे ।एक अहसान और कर देना अपने भाई पर स्नेहा से कहना मैं उसका गुनहगार हू हो सके तो मुझे माफ़ कर दे।मैंने उससे वादा किया था कि उसे कभी नही छोडूंगा पर में क्या करता क्योंकि एक वादा मैने माँ-पापा से किया था कि उन्हें भी कभी नही छोडूंगा।अगर किसी एक को छोड़ता को एक बुरा लगता।इसीलिए मैं आज सबसे दूर जा रहा ।एक वादा आज मुझसे करो कि आज रात जो भी हुआ उस कमरे उसके बारे में माँ-पापा से कभी नही पूछोंगे।मुझे उम्मीद है जो मैने तुम्हे जिम्मेदारियां दी है उन्हें हमेशा निभाओगे। "अपना ख्याल रखना भाई।"


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खत पढ़ कर मैं स्तब्ध रह गया।मैं जैसे ही भईया के कमरे में गया तो देखा भैया जमीन से 3 फुट ऊपर लटक रहे थे।मैंने माँ को आवाज दी और मैं तुरंत जमीन पर गिर गया।
मुझे आज भी नही पता कि उस रात क्या बात हुए थी उस 12×15 के कमरे में।मैंने आज भी नही पूछा माँ।ऐसा नही है कि में जानना नही छत हू।पर मैं एक वचन से बंधा हुआ हूं।पर इतना जरूर जनता हू जो कुछ भी हुआ उसने हम सभी की जिंदगी में हमेसा के लिए अंधेरा कर दिया।ऐसा नही है माँ-पापा को दुख नही।उन्हें हमेसा इस बात का दुख रहा है कि उन्होंने अपने बेटे खो दिया।भईया के जाने के गम 1 साल बाद माँ-पापा गुजर गए।
मैं स्नेहा के गम तो नही दूर सकता हूँ।पर हां हर शाम उसके दुख बाटने जरूर जाता हूं।उसे इस बात का जरूर दुख है कि अविरल भैया,माँ-पापा ने उसे हमेशा के लिए अकेला छोड़ दिया।स्नेहा कहती है मैंने अविरल को ये बताया था कि किसी को दिए हुए वचन नही तोड़ना चाहिए पर मैं प्रेम के मोह में ये नही बता पाई की मेरा वचन इतना मायने नही रखता है।

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मैं आज भी नही समझ पाता हूं कि कौन गलत था अविरल भैया या माँ-पापा।मैं आज भी इस प्रष्न न उत्तर नही खोज पाया हूं।अविरल भइया ने सभी को दिए हुए अपने वचनों का पालन किया।और माँ-पापा ने बचपन से पाल-पोश कर बाद किया था अगर उन्होंने कुछ मांग लिया होगा तो क्या गम था।मुझे लगता है वो सब समय का खेल था बस और कुछ नही।

अगर हमारी कहानी आपको अच्छी लगी तो तो हमे comments करके बताइये।अगर कोई सुझाव तो भी हमे कमेंट करके बताइये।

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